राम होने का दावा नहीं
रावन होने से भी इंकार नहीं
सपने देखता हूँ
मगर सपनो में जीना नहीं
अंतर्द्वंद में उलझा हुआ हूँ
मगर फैसले एकबारगी लेता हूँ
जानता हूँ हर पल
मौत के करीब जा रहा हूँ
मगर हर पल को भरपूर जीता हूँ
बड़ी जिन्दगी होने में यकीन है
लम्बी जिन्दगी जीने में नहीं.
गम में भी हँसता हूँ
खुशी में भी
मैं कौन हूँ,मैं क्या हूँ,
मेरा अस्तित्व क्या है?
प्रश्नचिह्न बहुत गहरा है
मगर जवाब तलाशने को
इन्सान की जिन्दगी बहुत ही छोटी...